तोप सिंह, युवा मीडिया बांदा(ब्यूरो)
●अछरौंड़ गांव में हाहाकार, कुएं बने जीवन रेखा, ग्रामीणों की सुबह तीन बजे से पानी की जद्दोजहद
भीषण गर्मी के बीच पेयजल की समस्या से परेशान अछरौंड़ ग्राम पंचायत के ग्रामीण बुधवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और डीएम को लिखित शिकायत पत्र सौंपा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में पेयजल संकट अपनी चरम सीमा पर है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत अछरौंड़ में गर्मी शुरू होते ही पेयजल की समस्या हर साल विकराल रूप ले लेती है। इस बार हालात इतने खराब हैं कि खेतों की कटाई छोड़ लोग घरों में पीने का पानी जुटाने में दिन-रात एक कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पेयजल के तीन मुख्य स्त्रोत—कुएं, रिंगबोर और भूरागढ़ जल संस्थान हैं। लेकिन रिंगबोर से जुड़े स्टोर (CWR) पर गंदगी का अंबार है। वर्षों से सफाई नहीं हुई और न ही नियमित रूप से ब्लीचिंग पाउडर डाला जा रहा है, जिससे पानी में दुर्गंध और कीड़े पनप रहे हैं। वहीं, भूरागढ़ जल संस्थान की सप्लाई लाइनें चोक पड़ी हैं, जिससे कई मोहल्लों में पानी पहुंच ही नहीं पा रहा।
● समस्या के स्थायी समाधान की मांग
गांव के ऊपरी हिस्सों में बीते 15 दिनों से एक बूंद पानी नहीं पहुंचा है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए जीवन की एकमात्र आस कुएं ही हैं। ग्रामीणों को सुबह तीन बजे ही कुओं पर पहुंचना पड़ता है क्योंकि बाद में पानी तलहटी में चला जाता है। गांव प्यास से कराह रहा है।
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और सचिव पर भी लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि किसी को भी ग्रामीणों की चिंता नहीं है। ग्रामीणों की मांग है कि जल संस्थान को सख्त निर्देश दिए जाएं, CWR की तत्काल सफाई कराई जाए और रिंगबोर व जल संस्थान दोनों से नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।इस मौके पर विमल द्विवेदी, रामजी द्विवेदी और घासीराम निषाद सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।


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