नई दिल्ली/बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की रहने वाली गीता देवी ने सरकारी योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली गीता देवी आज हर महीने 40 से 45 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि गांव की हजारों महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई।
स्वयं सहायता समूह से मिली नई पहचान
बागपत के छपरौली ब्लॉक के लुहारा गांव की निवासी गीता देवी वर्ष 2018 में कृष्णा स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह की अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें नेतृत्व का अवसर मिला और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में नई शुरुआत हुई। वर्तमान में वह 11 स्वयं सहायता समूहों का नेतृत्व कर रही हैं।
विद्युत सखी और बीसी सखी बनकर बढ़ाई आय
सरकारी सहायता के तहत रिवॉल्विंग फंड और सामुदायिक निवेश निधि मिलने के बाद गीता देवी ने 25 हजार रुपये का ऋण लेकर ‘विद्युत सखी’ के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने घर-घर जाकर बिजली बिल संग्रह का कार्य शुरू किया। साथ ही बीसी सखी के रूप में भी काम कर अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार किया।
आज वह हर महीने 40 से 45 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं, जबकि पहले उनकी मासिक आय करीब 15 हजार रुपये थी। अब तक वह करीब 2 करोड़ रुपये के बिजली बिल का संग्रह कर चुकी हैं, जिससे उन्हें लगभग 2 लाख रुपये का कमीशन मिला है।
3500 महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
गीता देवी की सफलता से प्रेरित होकर छपरौली ब्लॉक में करीब 3500 महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर आजीविका से जुड़ चुकी हैं। गीता देवी लगातार अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
लखपति दीदी कार्यक्रम में भी मिली पहचान
वर्ष 2023 में गीता देवी को ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम के तहत दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिला। उनकी उपलब्धियों को महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका के सफल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।


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