विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, जरूरत से ज्यादा स्किनकेयर से कमजोर हो सकता है त्वचा का प्राकृतिक सुरक्षा कवच
युवा मीडिया, लाइफस्टाइल डेस्क। आज के समय में चमकदार और बेदाग त्वचा पाने की चाहत में लोग कई तरह के स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले इंस्टेंट ग्लो और ओवरनाइट रिजल्ट्स के दावे भी लोगों को लगातार नए-नए सीरम, क्रीम और एक्सफोलिएटर आजमाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। हालांकि, त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा स्किनकेयर करना भी त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इस स्थिति को ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम कहा जाता है।
क्या है ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम?
विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति अपनी त्वचा की जरूरत को समझे बिना बहुत अधिक स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगता है, तो त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत (स्किन बैरियर) कमजोर होने लगती है। इसके कारण त्वचा में लालिमा, जलन, खुजली, रूखापन, मुंहासे और संवेदनशीलता जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
सोशल मीडिया बना बड़ी वजह
त्वचा विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले “इंस्टेंट ग्लो” और “ग्लास स्किन” जैसे ट्रेंड लोगों को बिना जरूरत कई प्रोडक्ट्स एक साथ इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे त्वचा को फायदा मिलने की बजाय नुकसान होने लगता है।
इन गलतियों से बचें
विशेषज्ञ बताते हैं कि ट्रेटिनॉइन, विटामिन-सी और ग्लाइकोलिक एसिड जैसे एक्टिव इंग्रीडिएंट्स प्रभावी जरूर हैं, लेकिन इन्हें बिना सही जानकारी के एक साथ इस्तेमाल करना त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा बार-बार चेहरा धोना, जरूरत से ज्यादा स्क्रब करना, केमिकल पील या फेस मास्क का अधिक उपयोग भी त्वचा की प्राकृतिक नमी और सुरक्षा परत को खत्म कर देता है।
स्किन टाइप के अनुसार चुनें प्रोडक्ट
हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। ऑयली, ड्राय, कॉम्बिनेशन और सेंसिटिव स्किन के लिए अलग-अलग उत्पाद बनाए जाते हैं। गलत प्रोडक्ट चुनने से त्वचा पर जलन, पिंपल्स और रूखापन बढ़ सकता है। इसलिए किसी भी स्किनकेयर रूटीन को अपनाने से पहले अपनी स्किन टाइप को समझना जरूरी है।
कम प्रोडक्ट्स, बेहतर देखभाल
विशेषज्ञों का कहना है कि त्वचा की देखभाल के लिए लंबा स्किनकेयर रूटीन जरूरी नहीं है। एक अच्छा क्लींजर, मॉइश्चराइजर और सनस्क्रीन जैसे बेसिक प्रोडक्ट्स अधिकांश लोगों के लिए पर्याप्त होते हैं। नए प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें।
सैंडविच मेथड हो सकती है फायदेमंद
दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि रेटिनॉइड का इस्तेमाल करना हो तो सैंडविच मेथड अपनाना बेहतर रहता है। इसमें पहले मॉइश्चराइजर लगाया जाता है, फिर रेटिनॉइड और उसके बाद दोबारा मॉइश्चराइजर लगाया जाता है। इससे त्वचा में जलन कम होती है और रेटिनॉइड का असर भी बना रहता है।
त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के लिए जरूरत से ज्यादा स्किनकेयर करने की बजाय संतुलित और सही रूटीन अपनाना अधिक फायदेमंद है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी नए प्रोडक्ट को अपनाने से पहले त्वचा की जरूरत को समझें और आवश्यकता पड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।


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