ईरान-अमेरिका तनाव से कच्चे तेल में उछाल, सेंसेक्स 550 अंक लुढ़का और निफ्टी 24,250 के नीचे फिसला
निवेशकों के सामने कौन-सा नया खतरा

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार सुबह कारोबार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ की। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 550 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,250 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की करोड़ों रुपये की पूंजी कुछ ही मिनटों में प्रभावित हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। आशंका है कि यदि यह संकट और गहराया तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दिखा, जिसने भारतीय शेयर बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर अर्थव्यवस्था, महंगाई और कॉरपोरेट कंपनियों की लागत पर पड़ता है।
सुबह के कारोबार में लाल निशान में बाजार
सुबह करीब 9:32 बजे सेंसेक्स 549.79 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,630.93 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 173.71 अंक यानी 0.71 प्रतिशत टूटकर 24,225 के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला और रुपया डॉलर के मुकाबले 21 पैसे कमजोर होकर 95.17 पर पहुंच गया।
तेल महंगा, इन कंपनियों पर सबसे ज्यादा दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सबसे बड़ा असर ऑयल मार्केटिंग और एविएशन कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) का शेयर करीब चार प्रतिशत तक लुढ़क गया। वहीं, एविएशन कंपनी इंडिगो के शेयरों में लगभग दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों का कहना है कि यदि तेल महंगा रहता है तो विमानन कंपनियों की ईंधन लागत बढ़ेगी, जबकि तेल विपणन कंपनियों के मार्जिन पर भी दबाव बनेगा।
पश्चिम एशिया के तनाव का असर एशियाई बाजारों में भी दिखाई दिया। जापान का टोपिक्स इंडेक्स करीब 0.5 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 लगभग 1.1 प्रतिशत गिर गया। हालांकि, हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स बढ़त बनाने में सफल रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट लगभग सपाट रहा। अमेरिकी और यूरोपीय वायदा बाजारों में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

