Tuesday, April 21, 2026
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UP Board Exam : प्रिंसिपल के घर लिखी जा रही थीं परीक्षा की कॉपियां, गिरोह के 19 गिरफ्तार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा में बड़ी कार्रवाई हुई है। हरदोई में हाईस्कूल के पेपर में बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। एसटीएफ लखनऊ और कछौना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में दो परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी कर केन्द्र व्यवस्थापक, परीक्षा प्रभारी, कक्ष निरीक्षक, अध्यापक व साल्वर समेत 19 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। इनमें जगन्नाथ सिंह इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल के आवास से 14 सॉल्वर पकड़े गए। जय सुभाष महाबली इंटर कॉलेज के बाहर दो महिला सॉल्वर मिलीं। वहीं प्रिंसिपल के आवास से तीन टीचरों को भी पकड़ा गया है। ये सभी छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं हल कर रहे थे।

गिरफ्तार आरोपियों में केन्द्र व्यवस्थापक, परीक्षा प्रभारी, कक्ष निरीक्षक व सॉल्वर शामिल

एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश के मुताबिक जय सुभाष महाबली इण्टर कालेज के बगल में बने केन्द्र व्यवस्थापक राम मिलन सिंह के मकान व जगन्नाथ सिंह पब्लिक इण्टर कालेज के केन्द्र व्यवस्थापक अनिल सिंह का कमालपुर कछौना स्थित मकान से परीक्षा में सेंधमारी करने वाले 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान केन्द्र व्यवस्थापक राम मिलन सिंह जय सुभाष महाबली इटर कालेज दलेलनगर हरदोई, परीक्षा प्रभारी मनीष सिंह, अध्यापक शारदा प्रसाद वर्मा, साल्वर अंकिता शर्मा,रीती, अध्यापक/साल्वर अमरेन्द्र सिंह जगन्नाथ सिंह पब्लिक इण्टर कालेज कटिया मऊगढ़ी  हरदोई, अमृतपाल, अरविन्द कुमार, शैलेन्द्र कुमार, मंसाराम शुक्ला, अदिति गुप्ता, सगुन गुप्ता, प्रियांषी पाल,  सगुन सिंह, माही सिंह, सुकृति चौरसिया, आख्या सिंह, जान्ह्वी गुप्ता व पल्लवी पाल निवासीगण हरदोई के रूप में हुई है।

गिरफ्तार आरोपियों के पास से हाई स्कूल अंग्रेजी विषय से सम्बन्धित केन्द्र व्यवस्थापक व कक्ष निरीक्षक के मोहर व हस्ताक्षर सहित हल की गयी 108 उत्तर पुस्तिकाएं, 65 प्रवेश पत्र, 12 नकल पर्ची, 12 मोबाइल, 25 हजार रुपये व अन्य नकल से संबंधित दस्तावेज बरामद हुए हैं। इन सभी पर यूपी सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन निवारण अधिनियम-2024 के तहत केस दर्ज किया गया है।

ठेका लेकर परीक्षा पास कराने की गारंटी

गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि जगन्नाथ पब्लिक इण्टर कालेज के प्रबन्धक अनिल सिंह हैं जो इस विद्यालय में वर्तमान समय में आयोजित बोर्ड परीक्षा के केन्द्र व्यवस्थापक भी है। वहीं जय सुभाष महाबली इण्टर कालेज के प्रबन्धक राम मिलन सिंह है, जो इस विद्यालय के केन्द्र व्यवस्थापक भी है, परन्तु वास्तविक रूप से विद्यालय का प्रबन्धन एवं कार्य उनके पुत्र मनीष सिंह द्वारा सम्पादित किया जाता है। मनीष सिंह व अनिल सिंह द्वारा बोर्ड परीक्षाओं में पास कराने के लिए  ठेका लिया गया है।

भारी संख्या में सॉल्वर और अध्यापक इनके घरों मे बैठकर प्रश्न पत्र हल करते है, जहां पर मौजूद स्कूल के अध्यापकों को इनके द्वारा समय से पूर्व प्रश्न पत्र ह्वाटसएप के जरिये उपलब्ध कराया जाता है। केन्द्र व्यवस्थापक व कक्ष निरीक्षक के मोहर व हस्ताक्षर सहित उत्तर पुस्तिका इन्ही अध्यापकों के माध्यम से साल्वरों को उपलब्ध करायी जाती है। अध्यापक वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को बोलकर हल कराते है। वहीं कठिन प्रश्नों की नकल पर्ची बनाकर भी साल्वरों को देते है। शेष प्रश्नों को साल्वर स्वयं हल करते है। एक पाली में एक साल्वर दो परीक्षार्थी की उत्तर पुस्तिकाएं लिखता है। जिसके बदले में साल्वर को प्रति कापी 1000 रुपये दिये जाते हैं। इन नकल माफियाओं द्वारा साल्वरों के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाएं लिखवाने के एवज में 25-50 हजार रुपये वसूले जाते है।

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रकम के हिसाब से दी जा रहीं थी सुविधाएं

आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि ऐसे परीक्षार्थी जो परीक्षा के समय परीक्षा केन्द्र में मौजूद नहीं होते है, उनकी उत्तर पुस्तिका सॉल्वर के माध्यम से केन्द्र के बाहर लिखी जाती है परन्तु अटेंडेन्ट सीट में उनकी हाजिरी तब तक नहीं अंकित की जाती जब तक उनकी उत्तर पुस्तिका परीक्षा केन्द्र में नहीं पहुंचती है। परीक्षा केन्द्र में उत्तर पुस्तिका आ जाने पर सम्बन्धित परीक्षार्थी को अटेंडेन्ट सीट में उपस्थित दिखाकर सॉल्वर द्वारा लिखी गयी उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन के लिए बोर्ड भेजे जाने वाले बण्डलों में रखवाकर भेज दिया जाता है।

इन नकल माफियाओं के माध्यम से परीक्षा दे रहे ऐसे परीक्षार्थी जो परीक्षा केन्द्र में तो मौजूद होते है परन्तु उनकी उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षा केन्द्र के बाहर सॉल्वरों के माध्यम से बाहर लिखी जाती है। अटेंडेन्ट सीट में उन्हें शुरू से ही उपस्थित दिखाया जाता है और उनकी उत्तर पुस्तिका भी जमा की जाती है। परन्तु उक्त परीक्षार्थी की साल्वर के माध्यम से बाहर लिखी गयी उत्तर पुस्तिका परीक्षा केन्द्र पर आने पर उसे मूल्यांकन के लिए भेजे जाने वाले बण्डल में रखकर वास्तविक परीक्षार्थी द्वारा लिखी गयी उत्तर पुस्तिका निकाल कर नष्ट कर दिया जाता है।

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