क्या अब हर परिवार पर है कैंसर का साया?

जानें बढ़ते खतरे की वजह और बचाव के उपाय

नई दिल्ली। कैंसर अब केवल मरीज तक सीमित रहने वाली बीमारी नहीं रह गई है। इसका असर पूरे परिवार की मानसिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। इसी वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) की नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के लगभग 92% लोग अपने जीवन में किसी न किसी रूप में कैंसर के प्रभाव से प्रभावित होंगे, चाहे वे स्वयं मरीज हों या उनके परिवार का कोई सदस्य इस बीमारी से जूझ रहा हो।

हर साल करोड़ों नए मरीज, लाखों मौतें

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल करीब 2.06 करोड़ नए कैंसर मरीज सामने आते हैं और लगभग एक करोड़ लोगों की मौत इस बीमारी से हो जाती है। औसतन हर दिन 26 हजार से अधिक लोगों की जान कैंसर के कारण जाती है। हृदय रोगों के बाद कैंसर दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है।

क्यों बढ़ रहा है कैंसर का खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर के मामलों में वृद्धि के पीछे कई कारण हैं—

तंबाकू और शराब का सेवन
अस्वस्थ खानपान और मोटापा
शारीरिक गतिविधियों की कमी
बढ़ता प्रदूषण
संक्रमण से जुड़े कुछ कैंसर
बढ़ती उम्र और जीवनशैली में बदलाव
समय पर जांच और इलाज की कमी

हालांकि कई देशों में तंबाकू नियंत्रण जैसे प्रयास हुए हैं, लेकिन उनका असर अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।

 

अमीर और गरीब देशों के बीच बड़ा अंतर

WHO की रिपोर्ट बताती है कि कैंसर का इलाज सभी देशों में समान नहीं है। उच्च आय वाले देशों में स्तन कैंसर से पीड़ित 87% महिलाएं पांच साल या उससे अधिक समय तक जीवित रहती हैं। वहीं कम आय वाले देशों में यह आंकड़ा केवल 42% है। इसके अलावा, दुनिया के केवल एक-तिहाई देशों ने कैंसर के इलाज को अपनी यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) में शामिल किया है। जरूरी दवाएं भी नहीं पहुंच रहीं सभी तक रिपोर्ट के अनुसार, कम और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में कैंसर की आवश्यक दवाओं की उपलब्धता 9% से 54% के बीच है, जबकि विकसित देशों में यही उपलब्धता 68% से 94% तक है। इससे समय पर इलाज और मरीजों के बचने की संभावना प्रभावित होती है।

कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर के करीब 30 से 50 प्रतिशत मामलों को सही जीवनशैली अपनाकर रोका जा सकता है। बचाव के लिए ये कदम अपनाएं—

तंबाकू और धूम्रपान से पूरी तरह दूरी रखें।
शराब का सेवन सीमित करें या छोड़ दें।
संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रित रखें।
हेपेटाइटिस-बी और HPV जैसे जरूरी टीके लगवाएं।
कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग कराएं।
किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें।
समय पर जांच ही सबसे बड़ा हथियार डॉक्टरों का कहना है कि यदि कैंसर की पहचान शुरुआती स्टेज में हो जाए तो इलाज की सफलता कई गुना बढ़ जाती है। स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और मुंह के कैंसर जैसे कई प्रकारों की शुरुआती जांच से मृत्यु दर कम की जा सकती है। देश में असम ने कैंसर नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है। राज्य सरकार के अनुसार व्यापक स्क्रीनिंग अभियान और कैंसर अस्पतालों के मजबूत नेटवर्क की वजह से वहां कैंसर मरीजों की सर्वाइवल रेट 62% तक पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर मानी जा रही है। लाखों लोगों की स्क्रीनिंग के दौरान शुरुआती चरण में कई मरीजों की पहचान कर समय पर इलाज शुरू किया गया।

AI भी निभा रहा अहम भूमिका

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नई तकनीकें कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद कर रही हैं। विशेषज्ञों ने ऐसी स्मार्टफोन तकनीक विकसित की है जो त्वचा पर मौजूद संदिग्ध तिल या धब्बों की जांच कर शुरुआती स्तर पर स्किन कैंसर के खतरे का संकेत दे सकती है। इससे मरीजों को समय रहते विशेषज्ञ के पास पहुंचने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष

WHO की रिपोर्ट यह बताती है कि कैंसर अब केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती का भी विषय बन चुका है। समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली, जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं ही इस बढ़ते खतरे को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका हैं।

 

 

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