Tuesday, May 5, 2026
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बीएनएस एक्ट में हुआ पहला निर्णय: दुराचारी को दस साल की सजा

लखनऊ। चिनहट इलाके में किशोरी से दुराचार करने वाले अभियुक्त को पाक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश विजेंद्र त्रिपाठी ने दस साल की सजा और 50 हजार जुर्माने से दण्डित किया है। वारदात के सात दिन में ही पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय में पेश की थी। प्रभावी पैरवी से वारदात के 192 दिन में आरोपी को सजा हुई।

12 सितंबर 2024 की शाम 17 वर्षीय किशोरी दवा लेने के लिए घर से निकली थी। चिनहट कस्बा अभिषेक मेडिकल के पास पहुंचने पर आरोपी बुद्ध विहार निवासी अजय कुमार ने चाकू की नोंक पर दुराचार किया था। किशोरी को बेसुध हालत में छोड़ कर आरोपी भाग गया था। इस वारदात का मुकदमा चिनहट कोतवाली में दर्ज हुआ।

आरोपी अजय को गिरफ्तार करने के साथ ही विवेचना को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। एडीसीपी अमित कुमार, एसओ भरत पाठक और विवेचक श्रीप्रकाश सिंह के प्रयास से सात दिन में चार्जशीट न्यायालय में पेश किया गया।

अभियोजन की ओर से विशेष अधिवक्ता अभिषेक उपाध्याय व अरुण कुमार ने अदालत में प्रभारी पैरवी की। जिस पर पाक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश विजेंद्र त्रिपाठी ने निर्णय सुनाते हुए दस साल और 50 हजार जुर्माने से अजय कुमार को दण्डित किया है। डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह ने बताया कि जुलाई 2024 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) एक्ट प्रभावी हुआ। जिसके बाद लखनऊ में दर्ज हुए मुकदमों में पहला निर्णय चिनहट कोतवाली में दर्ज हुए दुराचार की घटना में आया। मामले में अथक प्रयास व पैरवी करते हुए आरोपी को सजा दिलाई गई है।

दहेज हत्या के अभियुक्त को 10 साल की कठोर कारावास

आपरेशन कन्विक्शन के तहत लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने पैरवी करते हुए अभियुक्त को न्यायालय से 10 वर्ष की कठोर कारावास व 20 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित कराने में सफलता हासिल की है। अभियुक्त के खिलाफ वर्ष 2001 में दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया गया था।
प्रभारी निरीक्षक मोहनलालगंज अमर सिंह के नेतृत्व में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत न्यायालय में सघन पैरवी करते हुए दहेज हत्या के मामले में न्यायालय ने निर्णायक फैसला दिया गया। न्यायालय ने सम्बन्धित अभियुक्त लक्ष्मीनारायण निवासी आशियाना लखनऊ को दोषसिद्ध करते हुए 10 वर्ष का कठोर कारावास व 20000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर 6 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा दी गई ।

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