तोप सिंह, युवा मीडिया बाँदा(ब्यूरो)।
बाँदा महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित समापन कार्यक्रम में विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद एवं जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में सूफी गजल और शास्त्रीय गायन की प्रस्तुतियाँ दी गई, जिसमें गुजरात के आमिर,उस्मान मीर ने अपनी गायकी से श्रोताओं को आनंदित किया। इसके साथ ही, हास्य कलाकार सुनील पाल , राजन श्रीवास्तव ने अपने लाफ्टर शो से दर्शकों को हंसी का तोहफा दिया।
महोत्सव में शास्त्रीय नृत्य ,कथ्थक प्रस्तुतियाँ भी दी गई, जिसमें सरस्वती संगीत अकादमी लखनऊ और नृत्य कला गृह के कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम में चंगेलिया, डिमरियाई नृत्य का आयोजन भी किया गया, जिसने स्थानीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत की।
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देर रात में आयोजित कवि सम्मेलन में देशभर के प्रसिद्ध कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की। कवियों में सुरेन्द्र शर्मा दिल्ली, गजेन्द्र प्रियान्शु बाराबंकी, शैलेश गौतम प्रयागराज, सुदीप,भोला ,नीलोत्पल मृणाल दिल्ली सहित अन्य कवियों ने अपनी कविताओं, गीतों और ग़ज़लों से श्रोताओं को ज्ञानवर्धक और मनोरंजक अनुभव दिया। समापन अवसर पर प्रदेश के जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद, विधायक प्रकाश द्विवेदी, जिलाधिकारी जे0रीभा और अन्य जनप्रतिनिधियों ने महोत्सव में भाग लेने वाले सभी कलाकारों, कवियों और गायकों को सम्मानित किया। उन्हें स्मृति चिन्ह और अंग वस्त्र भेंट किए गए। जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन क्षेत्रीय लोककला और संस्कृति को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही, उन्होंने महोत्सव को सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का प्रतीक बताया।
विधायक प्रकाश द्विवेदी ने महोत्सव के सफल आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि महोत्सव के दौरान बुंदेलखंड की बहु-प्रतिभाओं को एक बड़ा मंच मिला, जिससे स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल, नगर पालिका अध्यक्ष मालती बासू गुप्ता, जिला महिला मोर्चा की अध्यक्ष वंदना गुप्ता, भाजपा जिला अध्यक्ष कल्लू राजपूत, और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अर्चना भारती ने किया। यह महोत्सव, न केवल बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहरों को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हुआ, बल्कि स्थानीय कलाकारों और कवियों को भी एक मंच प्रदान किया, जिससे उनकी प्रतिभाओं को निखारने का अवसर मिला।


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