Friday, May 8, 2026
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Lucknow हर सिपाही से 2000 की वसूली, आईपीएस चला रहे ‘गैंग, कांस्टेबल के वीडियो से खलबली

सीएम योगी से गुहार, कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
लखनऊ। राजधानी के लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में तैनात हर सिपाही से 2000 रुपए की वसूली हो रही है। यहीं पर तैनात एक कांस्टेबल ने आलाधिकारियों पर यह आरोप लगाते हुए वीडियो जारी किया है।

वीडियो को कांग्रेस समेत तमाम सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर शेयर किया जा रहा है। वीडियो ने पूरे लखनऊ पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है। करीब तीन मिनट के इस वीडियो में सिपाही ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उसका आरोप है कि आईपीएस अफसर पूरा नेटवर्क चला रहे हैं। एक चैनल बनाकर उन तक वसूली की यह रकम भेजी जा रही है।

अधिकारी इस लूट की जमींदारी व्यवस्था चला रहे हैं। कांस्टेबल आगे सीएम योगी से गुहार लगाते हुए कहता है कि हमारे इस पुलिस विभाग के काले अंग्रेज जो व्यवस्था चला रहे हैं उनसे हमें किसी प्रकार की न्याय की उम्मीद नहीं है। इसलिए मैं आज आपके समक्ष अपने पूरे पुलिस परिवार की तरफ से न्याय की गुहार करता हूं। कांस्टेबल के इस वायरल वीडियो के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

लखनऊ रिजर्व पुलिस लाइंस में तैनात कांस्टेबल सुनील कुमार शुक्ला का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। कांस्टेबल सुनील कुमार शुक्ला अपने वायरल वीडियो में कह रहा है कि मेरी नियुक्ति लखनऊ कमिश्नरेट के रिजर्व पुलिस लाइन में है। मैं लखनऊ कमिश्नरेट और उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में इन काले अंग्रेज अर्थात आईपीएस अधिकारियों द्वारा चलाई जा रही भ्रष्टाचार रूपी जमींदारी व्यवस्था पर प्रदेश के लोकतांत्रिक राजा और प्रदेश के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं। वीडियो में कांस्टेबल दावा कर रहा है कि पुलिस लाइन में ड्यूटी लगाने के नाम पर जवानों से हर महीने 2000 रुपये की वसूली होती है और यह पैसा नीचे से ऊपर तक अधिकारियों में बांटा जाता है। इतना ही नहीं वीडियो में काले अंग्रेजों का जिक्र करते हुए कांस्टेबल ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर ही गंभीर सवाल उठा दिए हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है।

कांस्टेबल कहता है कि मुख्यमंत्री जी लखनऊ कमिश्नरेट के रिजर्व पुलिस लाइन यानी आपकी नाक के नीचे इन काले अंग्रेज अर्थात आईपीएस अधिकारियों द्वारा लूट की जमींदारी व्यवस्था चलाई जा रही है। आपके द्वारा नियुक्त सिपाही दीवान बेचारा लूटा जा रहा है। यह व्यवस्था पूरी सुनियोजित सुव्यवस्थित ढंग से चलाई जा रही है।

इस तरह बना रखा है चैनल
कांस्टेबल बताता है कि वसूली की राशि नीचे से ऊपर पहुंचाने के लिए एक चैनल बनाया गया है। आईपीएस अफसर आरआई को नियुक्त कर रहे हैं। आरआई एक गणना प्रभारी को तैनात कर रहा है और गणना प्रभारी अपनी सुविधा के लिए गार्दों एक गार्द कमांडर नियुक्त करता है। अब बारी सिपाही दीवान की आती है। सिपाही दीवान अपनी ड्यूटी लगवाने के लिए गार्दों में 2000 प्रतिमाह दे रहे हैं। बेचारा गार्द कमांडर पैसा भी इक_ा करता है और अपने को बचा भी नहीं पाता है। उसे भी 2000 प्रति महीना की दर से जमा करना पड़ता है। कांस्बेटल आगे कहता है कि यह सारे पैसे को गणना प्रभारी के पास जमा कराया जाता है। गणना प्रभारी अपना हिस्सा काटकर आरआई को दे देता है। आरआई अपना हिस्सा काटकर उच्च अधिकारियों के पहुंचा देते हैं।

एक सेक्शन से 8 लाख की वसूली
कांस्टेबल ने दावा किया कि पूरा सिस्टम नीचे से ऊपर तक काम करता है। इतना ही नहीं सुनील कुमार शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया कि जरूरत से ज्यादा जवानों की ड्यूटी लगाकर कथित तौर पर वसूली की जाती है। कांस्टेबल आगे लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में वसूली का डाटा भी बताता है।

कहता है कि लखनऊ कमिश्नरेट में एक गणना डी है। गणना डी में तकरीबन 110 से 120 गारदे हैं। जिन गार्दों में तकरीबन 500 से 550 पुलिसकर्मी ड्यूटी लगती है। अगर 400 व्यक्तियों को भी लिया जाए तो 2000 के हिसाब से 8 लाख की उगाही इस गणना से होती है। यहां एक ही गणना नहीं है। तीन गणना और भी है। जहां भी इसी प्रकार से लूट की व्यवस्था चलाई जा रही है।

 

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