तोप सिंह, युवा मीडिया
बांदा(ब्यूरो)। रविवार को नवाबों के शहर बांदा को गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल यूं ही नहीं कहा जाता। रियासत काल से यहां के लोग सभी धर्मों के त्योहारों में एक-दूसरे के साथ मिलकर हिस्सा लेते आए हैं। इसी कड़ी में वनांगना संस्था द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी झलक देखने को मिली। संस्था के ‘तरंग मेरे सपने मेरी उड़ान’ कार्यक्रम के तहत हुसैनपुर कलां, नसेनी, जमवारा ,लहुरेटा गांव में सामूहिक इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया। इस मौके पर सांझ ढलते ही रोजेदारों और मेहमानों का जनसैलाब दस्तरखान पर उमड़ पड़ा, जहां पर विभिन्न तरह के लजीज व्यंजन सजे हुए थे।

खजूर, फल, शरबत से लेकर पारंपरिक मिठाइयों तक, हर जायके ने इस इफ्तार को खास बना दिया। इफ्तार के बाद महिलाएं और किशोरियां एक-दूसरे पर फूल बरसाकर होली की बधाई दी, जिससे माहौल और भी रंगीन हो गया। इस प्यार और सौहार्द की बेमिसाल तस्वीर ने साबित कर दिया कि गंगा-जमुनी तहजीब की रौशनी आज भी पूरी तरह से बरकरार है।
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वनांगना संस्था की डायरेक्टर पुष्पा शर्मा ने इस अवसर पर कहा, “आज जिस तरह का माहौल है, ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन बेहद जरूरी है। बांदा की संस्कृति ही ऐसी रही है कि यहां सभी धर्मों के लोग प्रेम और भाईचारे से रहते हैं। एक-दूसरे के त्योहारों में शरीक होते हैं।” वरिष्ठ संदर्भदाता शबीना मुमताज ने बताया, “रोजेदारों की दुआएं इस वक्त कबूल होती हैं। इफ्तार के दौरान वे अल्लाह के हुक्म का इंतजार करते हैं, जो संयम और श्रद्धा का प्रतीक है।” इस कार्यक्रम में शोभा देवी, श्यामकली, माया, आतिफा, इमराना, शाहिना, राहुल, हुसैन, जुनैद, मोईन, माया, रामप्यारी, शीलवती, शिफा, विमला, सावित्री समेत कई लोग शामिल हुए। इस सामूहिक इफ्तार कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि बांदा में गंगा-जमुनी तहजीब की जो मिसाल सदियों से कायम है, वह आज भी मजबूत है और भविष्य में भी कायम रहेगी।


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