लखनऊ । मंज़ूरुल हसन (राना)
राजधानी के राजाजीपुरम स्थित रानी लक्ष्मी बाई संयुक्त चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह वेंटिलेटर पर हैं। अस्पताल की बदहाली का आलम यह है कि पिछले लगभग 4 महीनों से यहाँ हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedic Surgeon) का पद रिक्त पड़ा है, जिससे क्षेत्रीय मरीजों की मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। हड्डी की चोट या असहनीय दर्द से कराहते हुए जब मरीज ओपीडी पहुँचते हैं, तो उन्हें डॉक्टर न होने का हवाला देकर बेरहमी से वापस लौटा दिया जाता है।
रेफरल सेंटर की भेंट चढ़ रहे गरीब मरीज
अस्पताल में हड्डी के विशेषज्ञ न होने के कारण मामूली चोट या फ्रैक्चर वाले मरीजों को भी सीधे बलरामपुर अस्पताल या केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया जाता है। सरकारी सुविधा का लाभ न मिल पाने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मजबूरन निजी नर्सिंग होम का रुख करना पड़ रहा है, जहाँ उनसे इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं।
संसाधन मौजूद, पर विशेषज्ञ गायब
विडंबना यह है कि अस्पताल परिसर में हड्डी के इलाज से जुड़े जरूरी संसाधन, उपकरण और कक्ष तो पूरी तरह सुसज्जित हैं, लेकिन एक अदद डॉक्टर की नियुक्ति न होने के कारण ये सभी सरकारी मशीनरी सफेद हाथी साबित हो रही हैं। लाखों के उपकरण धूल फांक रहे हैं और जनता इलाज के लिए दर-दर भटक रही है।
प्रशासनिक चुप्पी और गैर-जिम्मेदाराना रवैया
क्षेत्रीय जनता का सीधा सवाल है कि लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण शहर के इतने बड़े अस्पताल में 4 महीने से डॉक्टर की नियुक्ति न होना क्या प्रशासन की घोर लापरवाही नहीं है? शासन और स्वास्थ्य विभाग आखिर इस बदहाली को देखकर भी मौन क्यों है?
युवा मीडिया की टीम ने इस विषय पर अस्पताल प्रशासन का पक्ष जानने के लिए रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल की CMS डॉ. नीलिमा सोनकर को उनके फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, परंतु बार-बार फोन मिलाने के बावजूद उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। अधिकारियों का यह मौन रवैया क्षेत्र की जनता के प्रति उनकी संवेदनहीनता को स्पष्ट दर्शाता है।

