बजट में पूंजीगत खर्च को बढ़ाकर लगभग 12.2 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की गई है। इससे सड़कों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, शहरी अवसंरचना और अन्य बुनियादी परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि अधिक पूंजीगत निवेश से न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। रेलवे और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट्स और हाई-स्पीड कॉरिडोर की योजनाओं को भी बजट में स्थान दिया गया है।
कर व्यवस्था को लेकर बजट में संतुलित रुख अपनाया गया है। आयकर से जुड़े प्रावधानों में मध्यम वर्ग को राहत देने के संकेत मिले हैं, वहीं टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि कर आधार को व्यापक बनाने के साथ-साथ करदाताओं पर अनावश्यक बोझ नहीं डाला जाएगा। टैक्स सुधारों का उद्देश्य उपभोग और निवेश दोनों को प्रोत्साहित करना बताया गया है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। छोटे कारोबारों को वित्तीय सहायता देने और उनके विस्तार को बढ़ावा देने के लिए विशेष फंड और क्रेडिट सपोर्ट की व्यवस्था की गई है। इससे स्थानीय स्तर पर उद्योगों को मजबूती मिलने और रोजगार बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों को भी समर्थन देने की बात कही गई है।
तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 जैसी पहलों की घोषणा की गई है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और उन्नत तकनीक निर्माण का केंद्र बनाना है। इसके अलावा बायोफार्मा और स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की योजना भी बजट का अहम हिस्सा रही। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, अनुसंधान और दवाओं के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
कृषि और ग्रामीण विकास पर भी बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने और कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं को आगे बढ़ाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, आवास और रोजगार योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ाने की घोषणा की गई है, जिससे गांवों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
बजट पेश होने के बाद शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बाजार में गिरावट दर्ज की गई, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में बुनियादी ढांचे और निवेश पर केंद्रित यह बजट अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। कुल मिलाकर बजट 2026-27 में विकास, निवेश और सामाजिक संतुलन को साथ लेकर चलने की कोशिश दिखाई देती है, जिससे आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।