लखनऊ। सोशल मीडिया पर रविवार को सिलसिलेवार पांच पोस्ट हुए। बसपा प्रमुख मायावती के इन पांच पोस्ट ने पूरी पार्टी को बेचैन कर दिया। उत्तराधिकारी को लेकर किये गए पोस्ट में सवाल उठे कि क्या मायावती आकाश से निराश हैं।क्या अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर करने पर परिवार में कुछ ठीक नहीं चल रहा है? क्या मायावती फिर से नये उत्तराधिकारी की तलाश में है? दरअसल, मायावती ने पोस्ट में लिखा कि बीएसपी में स्वार्थ, रिश्ते-नाते महत्वहीन हैं, बहुजनहित सर्वोपरि है। उनका असली उत्तराधिकारी वही जो जी जान से पार्टी व मूवमेंट आगे बढ़ाने में लगा रहे।
यूपी की सियासत में हलचल
पार्टी के तमाम नेता फिलहाल मायावती के इस पोस्ट को लेकर भविष्य की चर्चाएं कर रहे हैं। न सिर्फ बसपा बल्कि यूपी की सियासत में मायावती ने रविवार को अपने फैसले से हलचल मचा दी। अभी तक जिस मुद्दे को बसपा के भीतर निर्विवाद माना जा रहा था, अब उसी पर फिर मायावती ने मंथन के संकेत दे दिए हैं।

साल 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि मायावती के भतीजे आकाश आनंद ही उनके उत्तराधिकारी होंगे। फिर साल 2024 के चुनाव से पहले साल 2023 में मायावती ने उन्हें पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर पद पर नियुक्त किया। इसके साथ ही अपना उत्तराधिकारी भी घोषित किया। साल 2024 के चुनाव के दौरान ही आकाश आनंद को पार्टी के राष्टï्रीय कोआर्डिनेटर के पद से हटा दिया और कहा कि वह अभी मेच्योर नहीं हैं।
मायावती ने लोकसभा चुनाव खत्म होने के कुछ दिनों बाद ही आकाश आनंद को पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर पद पर दोबारा पदासीन कर दिया। इसके बाद दिल्ली, हरियाणा चुनाव की जिम्मेदारी भी दी लेकिन नतीजे सिफर रहे। दरअसल, 12 फरवरी को बसपा चीफ ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन पर पार्टी में गुटबाजी का आरोप लगा। इसी दिन बसपा चीफ ने नितिन सिंह को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया। नितिन सिंह के बारे में दावा है कि वह अशोक सिद्धार्थ के करीबी हैं।
अशोक सिद्धार्थ के बारे में कहा जाता है कि वह मायावती की राजनीति से प्रभावित हुए और नौकरी छोड़ दी फिर बसपा में शामिल हो गए। अब 16 फरवरी को बसपा चीफ ने अपने उत्तराधिकार को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया। जिसका यह अर्थ निकाला जा रहा है कि आकाश आनंद को लेकर भी बहन जी आश्वस्त नहीं हैं।
एक बात और गौर करने वाली है कि आकाश आनंद, बसपा चीफ के हर पोस्ट को या तो रिपोस्ट करते हैं या उस पर अपनी बात रखते हुए पोस्ट करते हैं लेकिन 12 फरवरी के जिस पोस्ट में मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को निष्कासित करने का ऐलान किया था, उसको आकाश ने रिपोस्ट तक नहीं किया है। चर्चा ये भी है कि दिल्ली और हरियाणा के चुनाव में आकाश आनंद ने अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के फैसलों को प्राथमिकता दी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर किये जाने के बाद से ही परिवार में कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मायावती के पांच पोस्ट उसी का संकेत हैं।
ऐसे बढ़ा और घटा आकाश का कद
मायावती अपने भतीजे आकाश आनंद को आठ साल से लगातार पार्टी में स्थापित करने की कोशिश में जुटी हैं। आकाश सबसे पहले 2017 में सहारनपुर दंगों के दौरान मायावती के साथ नजर आए थे। उसके बाद पार्टी की एक बैठक में पदाधिकारियों से उनका परिचय करवाया था। बाद में उनको राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और फिर राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाकर आगे किया। इस दौरान आकाश ने कई राज्यों में संगठन का काम किया। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले आकाश को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया और यूपी चुनाव में उतारा। यूपी में आकाश की कई सभाएं हुईं। उसी दौरान सीतापुर में एक रैली के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी पर एफआईआर हुई तो आकाश को उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया। लोकसभा चुनाव के बाद उनको फ़िर से बहाल कर दिया।
आखिर क्यों दी चेतावनी?
दरअसल अशोक सिद्धार्थ और राम जी गौतम के दो वरिष्ठ पदाधिकारी हैं। दोनों मायावती के काफी विश्वसनीय रहे हैं। इनके पास कई राज्यों का प्रभार रहा है। इस बीच जब आकाश आनंद को राजनीति में उतारा तो इन दोनों पदाधिकारियों को ही उनके साथ लगाया। इनसे उम्मीद यह थी कि वे आकाश को परिपक्व राजनीतिज्ञ बनाएं। लेकिन आकाश आनंद लोकसभा चुनाव में मायावती के उम्मीद पर खरे नहीं उतरे। उनको पद से हटाने के बाद एक बार फिर माफ करते हुए बहाल कर दिया। फिर से दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी आकाश को दी गई।


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