भारत के तकनीकी अनुसंधान क्षेत्र में एक और बड़ी पहल हुई है। IIIT-अलाहाबाद (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, प्रयागराज) और NSTL (नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी, विशाखापट्टनम) मिलकर ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जो पानी के अंदर मौजूद वस्तुओं, समुद्री जीवों और संरचनाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डीप लर्निंग की मदद से पहचान सकेगी।
इस तकनीक में उन्नत सोनार सिस्टम, अंडरवॉटर कैमरा सेंसर और मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म का प्रयोग होगा।
यह सिस्टम समुद्र की गहराई में भी कम दृश्यता वाले क्षेत्रों में वस्तुओं की पहचान कर सकेगा।
साथ ही यह समुद्र तल की आकृति और परिवेश का डेटा एकत्रित कर विश्लेषण भी करेगा।

इस परियोजना को DRDO के तकनीकी समर्थन से विकसित किया जा रहा है, NSTL हार्डवेयर और परीक्षण सुविधाएँ प्रदान करेगा, जबकि IIIT-A एल्गोरिद्म, डेटा साइंस और AI-मॉडल पर कार्य करेगा।
इस तकनीक की उपयोगिता रक्षा क्षेत्र में: दुश्मन की पनडुब्बियों और माइन डिटेक्शन के लिए, पर्यावरण अनुसंधान में: समुद्री प्रदूषण और जैव विविधता की निगरानी के लिए, औद्योगिक क्षेत्र में: तेल और गैस पाइपलाइनों की जांच, समुद्री निर्माण कार्यों में होगी ।
IIIT-अलाहाबाद के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने बताया —
“यह परियोजना भारत को समुद्री तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी और रक्षा प्रणाली को नई दिशा देगी।”
NSTL के निदेशक ने कहा —
“यह टेक्नोलॉजी नौसेना के भविष्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।”


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