लखनऊ । किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) परिसर में स्थित पंजीकृत वक्फ दरगाह ‘हजरत शाह कवामुद्दीन अब्बासी उर्फ हाजी हरमैन शाह (रह.)’ को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानन्द तथा भूमि संबंधी मामलों के नोडल अधिकारी प्रो. के.के. सिंह के खिलाफ पुलिस में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने संगठन पर निराधार आरोप और धमकीपूर्ण भाषा के प्रयोग का आरोप लगाते हुए कानूनी नोटिस जारी किया है।
सैयद बाबर इस्लाम की तहरीर में लगाए गए आरोप
कटरा अबुतुराब खान, नक्खास निवासी सैयद बाबर इस्लाम द्वारा दी गई तहरीर में कहा गया है कि 26 अप्रैल 2025 को प्रो. के.के. सिंह और कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानन्द अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ दरगाह परिसर में पहुंचे। आरोप है कि बिना सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना वक्फ बोर्ड की अनुमति धार्मिक स्थल में प्रवेश कर चबूतरे, दीवारों और अन्य स्थायी निर्माणों को क्षतिग्रस्त किया गया।

तहरीर में यह भी उल्लेख है कि जब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो उन्हें पुलिस कार्रवाई की धमकी दी गई। कथित रूप से बुलडोजर चलाने की चेतावनी भी दी गई, जिससे मौके पर भय और तनाव का माहौल बन गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि दरगाह वक्फ अधिनियम 1995 के तहत पंजीकृत धार्मिक संपत्ति है और मुस्लिम समुदाय की आस्था का केंद्र है। उन्होंने निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। चौक कोतवाली के इंस्पेक्टर नागेश उपाध्याय के अनुसार अप्रैल 2025 की घटना के संबंध में तहरीर प्राप्त हुई है और जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने प्रो. के.के. सिंह के माध्यम से जारी किया लीगल नोटिस
केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. के.के. सिंह के मुताबिक 29 जनवरी को ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानन्द को ज्ञापन सौंपकर नेत्र विभाग के पीछे स्थित हरमैन साहब की दरगाह के चारों ओर की भूमि वापस करने तथा विभिन्न मजारों को हटाने संबंधी नोटिस वापस लेने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में केवल आसपास का अतिक्रमण हटाया गया था, मजार को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया। प्रो. सिंह ने स्पष्ट किया कि मजार का प्रबंधन एक स्वतंत्र कमेटी के पास है और ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन इस मामले में पक्षकार नहीं है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 14 फरवरी को संगठन की ओर से भेजे गए नोटिस में “कुछ भी करने” जैसी आपत्तिजनक और धमकीपूर्ण भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हुई। इसी कारण प्रशासन ने संगठन को लीगल नोटिस जारी किया है।
भ्रम फैलाया जा रहा, दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करेंगे
KGMU प्रवक्ता और शिक्षक संघ अध्यक्ष डॉ.केके सिंह ने बताया- अप्रैल 2025 में विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। हाई कोर्ट के आदेश के बाद बुलडोजर चला था। अब इतने दिनों बाद फिर अनाधिकृत व्यक्ति के द्वारा ये भ्रम फैलाया जा रहा हैं। पहले 29 दिसंबर को नोटिस दी गईं और इसके बाद 14 जनवरी को दूसरी नोटिस दी गई। इसके जवाब में जब विश्वविद्यालय के लीगल सेल ने नोटिस दिया तो ये तहरीर सामने आई है। अब सिर्फ विधिक कार्रवाई का विकल्प बचा है। शासन को भी इस मामले से अवगत कराया जाएगा। मेरा ये भी कहना हैं कि इस तरह के बेबुनियाद अफवाह से मेरे और कुलपति की जान का खतरा हैं।
सैयद बाबर अशरफ का बयान
ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के महासचिव सैयद बाबर अशरफ ने कहा कि केजीएमयू प्रशासन जानबूझकर मामले को बढ़ा रहा है। उनका दावा है कि मजार लगभग 650 वर्षों से स्थापित है और संगठन बातचीत के माध्यम से समाधान चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन ने रुख नहीं बदला तो वे कानूनी रास्ता अपनाते हुए हर जिले में मुकदमा दर्ज कराएंगे। फिलहाल मामला पुलिस जांच के अधीन है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।

