Thursday, January 15, 2026
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संभल हिंसा : एएसपी अनुज चौधरी सहित दर्जनभर पुलिस कर्मियों पर FIR का आदेश

संभल शाही मस्जिद हिंसा के दौरान गोली चलाने आ आरोप, पिता की याचिका पर कोर्ट ने दिया आदेश

लखनऊ। संभल शाही जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा मामले में कोर्ट ने पुलिस फायरिंग में घायल हुए बिस्किट विक्रेता आलम के पिता की याचिका पर तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी सहित 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश मंगलवार 13 जनवरी 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर की अदालत ने सुनवाई के बाद जारी किया।


गौरतलब है कि 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें बिस्किट विक्रेता आलम घायल हो गया। घायल की शिकायत के आधार पर उसके पिता ने तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए याचिका दायर की थी। अदालत ने 9 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े सभी साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया मामला एफआईआर का बनता है और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इसके आधार पर सीजेएम ने आदेश दिया कि तत्कालीन सीओ (अब एसपी ग्रामीण फिरोजाबाद) अनुज चौधरी, संभल कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर अनुज तोमर और अन्य 10 पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। बताते चले कि इस हिंसा में चार युवकों की मौत हुई थी, जबकि कई पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी भी घायल हुए थे।

टोस्ट बेचने निकला था युवक
नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन निवासी यामीन ने सीजेएम कोर्ट में 6 फरवरी, 2025 को याचिका दायर की थी। यामीन ने बताया कि उनका बेटा आलम 24 नवंबर, 2024 को रस्क (टोस्ट) बेचने घर से निकला था। शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पहुंचने पर पुलिस ने उसे गोली मार दी थी। यामीन ने तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी और संभल कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 12 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया था। 9 जनवरी, 2026 को कोर्ट में मामले पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।


यामीन के वकील चौधरी अख्तर हुसैन ने बताया कि उनके मुवक्किल के बेटे ने पुलिस से छिपकर अपना इलाज कराया। कोर्ट से पूर्व सीओ अनुज चौधरी और पूर्व इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर की मांग की गई थी। अख्तर हुसैन ने मंगलवार शाम को आदेश की जानकारी मिलने की पुष्टि की, हालांकि देर शाम आदेश जारी होने के कारण उन्हें अभी तक कोर्ट का लिखित आदेश नहीं मिला है। इंस्पेक्टर अनुज तोमर चंदौसी कोतवाली के प्रभारी वर्तमान में अनुज चौधरी फिरोजाबाद के अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पद पर तैनात हैं, जबकि अनुज तोमर संभल की कोतवाली चंदौसी के थाना प्रभारी हैं। संभल हिंसा के दौरान अनुज चौधरी सीओ संभल थे। बाद में उनका प्रमोशन होकर वे एएसपी बन गए। अनुज चौधरी संभल हिंसा और ’52 जुम्मे होली एकÓ वाले बयान को लेकर काफी चर्चा में रहे थे।

24 नवंबर को सर्वे के दौरान हिंसा में 4 की हुई थी मौत

संभल की जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष ने दावा किया था ये पहले हरिहर मंदिर था, जिसे बाबर ने 1529 में तुड़वाकर मस्जिद बनवा दिया। इसे लेकर 19 नवंबर, 2024 को संभल कोर्ट में याचिका दायर हुई। उसी दिन सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह ने मस्जिद के अंदर सर्वे करने का आदेश दिया। कोर्ट ने रमेश सिंह राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया। उसी दिन शाम 4 बजे सर्वे के लिए टीम मस्जिद पहुंच गई। 2 घंटे सर्वे किया। हालांकि, उस दिन सर्वे पूरा नहीं हुआ।

इसके बाद 24 नवंबर को सर्वे की टीम जामा मस्जिद पहुंची। मस्जिद के अंदर सर्वे हो रहा था। इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग जुट गए। पुलिस का कहना है कि भीड़ ने पुलिस टीम पर पत्थर फेंके। इसके बाद हिंसा भड़क गई। इसमें गोली लगने से 4 लोगों की मौत हो गई थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, चर्चित सीओ अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हुए। हिंसा के बाद पुलिस ने 3 महिलाओं सहित 79 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया था। संभल कोतवाली एवं थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई। सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित 40 लोगों के खिलाफ नामजद और 2750 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। 18 जून को एसआईटी ने 1128 पन्नों में सांसद बर्क सहित 23 लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। हालांकि, सपा विधायक के बेटे सुहैल इकबाल का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं है।

क्या बोले एसपी
संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि हिंसा के दौरान जिन लोगों को गोली लगी थी, वह 32 बोर की थी और 32 बोर पुलिस इस्तेमाल नहीं करती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से लेकर बैलिस्टिक जांच रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग भी जांच पूरी कर शासन को सौंप चुका है। जो कैबिनेट में पेश हो चुकी है। पुलिस ने मामले में जांच की है। सीओ व कोतवाल की सरकारी शस्त्र से कोई गोली नहीं चली। गोली लगने से घायल युवक के मामले में फिर भी कोर्ट ने इस तरह का आदेश दिए है। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।

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